महाराणा प्रताप की जीवन कथा

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Written By Nishtha Gupta

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महाराणा प्रताप की कहानी इन हिंदी

महाराणा प्रताप मेवाड़ के महान शासक थे। 16वीं शताब्दी के राजपूत शासको में महाराणा प्रताप ऐसे शासक थे जो अकबर को लगातार टक्कर देते रहते थे। इसकी युद्ध नीति रक्षात्मक हुआ करती थी। इस नीति का मूल उद्देश्य मेवाड़ राज्य पर मुगल आधिपत्य को रोकना औऱ राज्य में जनधन की रक्षा करते हुए आक्रमणकारी को अधिकाधिक क्षति पहुँचा होता था। 

महाराणा प्रताप की जीवन कथा

महाराणा प्रताप की जीवन कथा

संपूर्ण पर्वतीय भाग की किलाबंदी करना औऱ शत्रु का रज्य में प्रवेश होने से रोकना तथा यदि उशका प्रवेश हो भी जाए तो उसेअधिकाधिक हानि पहुँचाना ताकि इससे त्रस्त होकर वह वापस ही लौट जाए। इसके लिए महाराणा प्रताप को परवतीय क्षेत्र में रहने वाली आदिवासी भील जाति का बहुत सहयोग मिलता था। 

भीलों द्वारा गुप्तचरो औऱ संदेशवाहकों का कार्य भी किया जाता था। भीलों के इस प्रकार के सहयोग और निडर क्षमता को देखकर महाराणा प्रताप द्वारा भीलों को अपनी सैन्य व्यवस्था में उच्च स्थानों पर नियुक्त किया गया।

महाराणा प्रताप मेवाड़ के महान शासक हुआ करते थे, यदि इनके जन्म के विषय में बात कि जाए तो इसके जन्म को लेकर दो धारणाएँ है। प्रथम के महाराणा प्रताप कुम्भलगढ़ दुर्ग में जन्मे थे, यह धारणा इस लिए है क्योकि महाराणा प्रताप माता पिता का विवाह कुंभलगढ़ के महल में हुआ था। दूसरा धारणा लोगो की यह है कि इनका जन्म पाली के राजमल में हुआ है।

महाराणा प्रताप की माँ का नाम जयवंताबाई था जो कि सोननगर के अखैराज की बेटी है। महाराणा प्रताप के  पिता का नाम उदय सिंह था। 

महाराणा प्रताप ने अपने जीवनकाल में कुल 11 शादियाँ रचायी थी। महाराणा प्रताप कि पत्नियों और उनके 17 बच्चो  के नाम।

  1. महारानी अजबदे पंवार 👉 अमर सिंह व भगवानदास
  2. अमरबाई राठौर 👉 नत्था
  3. शहमतिबाई हाडा👉 पुरा
  4. अलमदेबाई चौहान 👉जयवंतसिंह
  5. रत्नावतीबाई परमार 👉 माल,क्लिंगु और गज
  6. लखाबाई 👉 रायभाना
  7. जसोबाईचौहान 👉 कल्याणदास
  8. चंपाबाई जंथी 👉 कल्ला, दुर्जनसिंह, सनवालदास
  9. सौलनखिनीपुरबाई 👉 साशा व गोपाल
  10. फूलबाई राठौर 👉 चंदा व शिखा
  11. खींचर आशाबाई 👉 हत्थी व रामसिंह

महाराणा प्रताप की मृत्यु कैसे हुई

महाराणा प्रताप की मत्यु 19 जनवरी 1597 को उदयपुर (राजस्थान) में हुई थी। महाराणा प्रताप ने अपने जीवनकाल का अंतिम बचा हुआ समय अपनी राजधानी चावंड के (राजस्थान – उदयपुर) के कुछ दूर एक गाँव है बांडोली यही पर बिताया। बांडोली गाँव की नदी में ही महाराणा प्रताप का अंतिम संस्कार कर दिया गया। 

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